प्रशासनिक और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
- चूरू जिले की स्थापना: आज़ादी के बाद वर्ष 1948 में बीकानेर रियासत से अलग होकर चूरू जिला अस्तित्व में आया था.
- स्थापना एवं नाम: शहर की स्थापना लगभग 1620 में जाट प्रमुख ‘चुरु’ द्वारा हुई, जिनसे इसका नाम पड़ा
- किला: शहर के केंद्र में स्थित चूरू का किला (जेहनी से 1739 ई.) थार के परिवेश में ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है
इतिहास, स्थापत्य और संस्कृति
- थार का प्रवेशद्वार: चूरू को अक्सर “Gateway to the Thar Desert” कहा जाता है, जिससे इसका महत्व प्राकृतिक और पर्यटन दृष्टि से बढ़ जाता है।
- शेखावाटी की हवेलियाँ: यह क्षेत्र अपनी भित्ति चित्रों से सजी विशाल हवेलियों (Kanhaiya Lal Bagla Haveli, Surana Haveli) के लिए प्रसिद्ध है ।
- इन ऐतिहासिक हवेलियों के संरक्षण के लिए राज्य सरकार ने कोशिश शुरू कर दी है — उन्हें संरक्षित स्मारकों के रूप में मान्यता देने और Heritage Conservation Bill को फिर से तैयार करने की योजना पर कार्य चल रहा है।
प्रमुख पर्यटक स्थल और धार्मिक स्थल
- Tal Chhapar जीव अभयारण्य: सुजांगढ़ तहसील में स्थित यह अभयारण्य बकरे और विविध पक्षियों के लिए प्रसिद्ध है; इसे वर्ष 1971 में स्थापित किया गया था
- जैसे सुजांगढ़ में स्थित Tirupati Balaji मंदिर – जो दक्षिण भारतीय शैली में बना राजस्थान का पहला ऐसा मंदिर है — और यहाँ एक ऐतिहासिक जैन तीर्थ Devsagar Singhee Temple भी मौजूद है ।
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