Sunday, August 17, 2025

प्रशासनिक और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

 

प्रशासनिक और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

  • चूरू जिले की स्थापना: आज़ादी के बाद वर्ष 1948 में बीकानेर रियासत से अलग होकर चूरू जिला अस्तित्व में आया था.
  • स्थापना एवं नाम: शहर की स्थापना लगभग 1620 में जाट प्रमुख ‘चुरु’ द्वारा हुई, जिनसे इसका नाम पड़ा.
  • किला: शहर के केंद्र में स्थित चूरू का किला (जेहनी से 1739 ई.) थार के परिवेश में ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है

चूरू जिला, राजस्थान राज्य का एक प्रशासनिक जिला है, जिसका मुख्यालय चूरू शहर है। 1620 में जाट सरदार चुरू द्वारा स्थापित, यह बाद में राठौड़ वंश के राजपूत शासकों के अधीन आ गया. 1541 में राव मालदेव के शासनकाल के दौरान, बीकानेर के साथ युद्ध के बाद, यह क्षेत्र बीकानेर के प्रभुत्व में आ गया. स्वतंत्रता के समय, यह बीकानेर रियासत का हिस्सा था, और 1948 में इसे बीकानेर से अलग कर पुनर्गठित किया गया. 

प्रशासनिक संरचना:

  • जिला कलेक्टर:
  • चूरू जिले के प्रशासनिक प्रमुख जिला कलेक्टर होते हैं, जो वर्तमान में अभिषेक सुराणा हैं. 

तहसीलें:

  • जिले में कई तहसीलें शामिल हैं, जैसे कि राजगढ़. 
  • पंचायतों और गांवों:
  • चूरू जिले में 902 गांव हैं, जो विभिन्न पंचायतों में बंटे हुए हैं. 
  • सबसे अमीर गांव:
  • राजगढ़ तहसील का खुड्डी गांव चूरू जिले का सबसे अमीर गांव माना जाता है, जिसकी संपत्ति लगभग 1 बिलियन अमेरिकी डॉलर है. 
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:
  • चुरू जिले का नाम जाट सरदार चुरू के नाम पर रखा गया है. 
  • बाद में, यह राठौड़ राजपूत शासकों के अधीन आ गया. 
  • 1541 में बीकानेर के साथ युद्ध के बाद, यह क्षेत्र बीकानेर के प्रभुत्व में आ गया. 
  • स्वतंत्रता के बाद, इसे बीकानेर से अलग कर दिया गया. 

अन्य महत्वपूर्ण जानकारी:

  • चुरू जिले में करणी माता का मंदिर भी स्थित है. 
  • चूरू का किला, मालजी का कमरा, और सेठानी का जोहरा जिले के प्रमुख पर्यटन स्थल हैं. 
  • चुरू जिले के सादुलपुर कस्बे में लक्ष्मी निवास मित्तल, आर्सेलर मित्तल के अध्यक्ष एवं सीईओ, का जन्म हुआ था. 

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प्रशासनिक और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

  प्रशासनिक और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि चूरू जिले की स्थापना: आज़ादी के बाद वर्ष 1948 में बीकानेर रियासत से अलग होकर चूरू जिला अस्तित्व में आया था...